*‼️"एक पाप से सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं"‼️* ```महाभारत के युद्ध पश्चात जब "श्री कृष्ण" लौटे तो रोष में भरी रुक्मणी" ने उनसे पूछा ?? युद्ध में बाकी सब तो ठीक था। किंतु आपने "द्रोणाचार्य" और "भीष्म पितामह" जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया ?? "श्री कृष्ण" ने उत्तर दिया। ये सही है की उन दोनों ने जीवन भर धर्म का पालन किया। किन्तु उनके किये एक "पाप" ने उनके सारे "पुण्यों" को नष्ट कर दिया।``` *वो कौन से पाप थे ??* ```जब भरी सभा में "द्रोपदी" का चीरहरण हो रहा था। तब यह दोनों भी वहां उपस्थित थे। बड़े होने के नाते ये दुशासन को रोक भी सकते थे। किंतु इन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके इस एक पाप से बाकी सभी धर्मनिष्ठता छोटी पड़ गई। और "कर्ण" वो तो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था। कोई उसके द्वार से कोई खाली हाथ नहीं गया। उसके मृत्यु मे आपने क्यों सहयोग किया। उसकी क्या गलती थी ?? हे प्रिये! तुम सत्य कह रही हो। वह अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था और उसने कभी किसी को ना नहीं कहा। ...
Mahabharat महाभारत के समय श्रीकृष्ण जी महाराज की भौतिक आयु 89 वर्ष, अर्जुन की भी लगभग इतनी ही थी। युधिष्ठिर जी 91वर्ष के थे, द्रौपदी लगभग 70 वर्ष की थी। दुर्योधन 90 वर्ष के, अभिमन्यु 16, शिखंडी सौ के आस पास, धृष्टद्युम्न 70, भीष्म जी 600, कृपाचार्य एवं द्रोणाचार्य 400, बाह्लीक 900 के लगभग, एवं कर्ण की आयु लगभग 140 वर्ष की थी। महाभारत में 18 अक्षौहिणी सेनाओं ने पैंसठ वर्ग किमी के क्षेत्र में युद्ध किया था। पहले दोनों ओर से नौ नौ अक्षौहिणी सेनाएँ थीं, लेकिन छल से द्वारिका और मद्र देश की सेनाओं को अपने पक्ष में कर लेने से कौरवों की सेना बढ़ कर ग्यारह अक्षौहिणी हो गयी तथा पांडवों की सेना घट कर सात अक्षौहिणी रह गयी। मनुष्यों के अतिरिक्त इस युद्ध में पांडवों की ओर से भीमपुत्र घटोत्कच के नेतृत्व में लंकापुरी एवं असम के मायांगपुरी की राक्षस सेना तथा भोगवती पुरी से अर्जुनपुत्र इरावान के नेतृत्व में नाग सेना भी युद्ध कर रही थी। इरावान को छल से अलम्बुष ने मारा था। कौरवों की ओर से पाताल लोक से अलायुध के नेतृत्व में एवं मर्त्यलोक से अलम्बुष के नेतृत्व में राक्षस सेना युद्ध कर रही...